Environment

Environment awareness program cum Tree plantation

ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में लक्षित समूह एवं अन्य व्यक्तियों को पर्यावरण के बारे में जानकारी व जागरूकता की समझ विकसित की गई। चर्चा के दौरान यह बताया गया कि व्यक्ति अपने पर्यावरण में निवास करता है। वह अपने पर्यावरण का हिस्सा होता है। पर्यावरण में होने वाली विभिन्न प्रकार की गतिविधियों से वह बहुत प्रभावित होता है। इसलिए जरूरी है कि हमारा पर्यावरण साथ-सुथरा रहे। पर्यावरण में किसी प्रकार का असंतुलन न उत्पन्न हो जाए । इसलिए हमंे पर्यावरण को असंतुलित होने वाली गतिविधियों केा नियंत्रित करना होेगा। हमें अपने चारों ओर की आबोहवा को शुद्ध रखना होेगा। हमें जल और वायु की शुद्धता बनाए रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा वृक्षों को लगाना होगा और उनकी सुरक्षा करनी होगी। विषेष रूप से पर्यावरण को असंतुलित करने वाले कारकों के प्र्रति अत्यधिक लोगों को जागरूक करना होगा।
पर्यावरण हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पृथ्वी इसके बिना अधूरी है। पर्यावरण के कारण ही समस्त प्राणियों का अस्तित्व पनप पाता है। जलए पृथ्वीए आकाशए हवा तथा अग्नि इसके अंग है। प्रकृति और पर्यावरण के बीच बहुत गहरा संबंध है। श्पर्यावरणश् प्रकृति की ही देन है। पर्यावरण पृथ्वी के चारों ओर के वातावरण को कहा जाता है। हमारे जीने के लिए आवश्यक तत्वों को बनाए रखने के लिए उसने समस्त बातों का ध्यान रखा है। पर्यावरण पृथ्वी को चारों से ढककर हमारी रक्षा करता है। इस तरह प्रकृति हमारी हर छोटी.बड़ी आवश्कताओं को पूरा करती है। प्रकृति इस बात का ध्यान भी रखती है कि पृथ्वी पर हो रही हर छोटी बड़ी पक्रिया में संतुलन बना रहे। यदि प्रकृति के स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की जाती हैए तो इसका परिणाम हमें पर्यावरण में साफ़ तौर पर दिखाई देता है। प्राचीनकाल का पर्यावरण बहुत साफ़ और शुद्ध था। इसका कारण था उस मनुष्य आधुनिक नहीं हुआ था। वह प्रकृति के साथ तालमेल बिठाए हुए था। लोगों को प्रकृति सानिध्य प्राप्त था और वह उसके सानिध्य पाकर प्रसन्न थे। परन्तु जैसे.जैसे मनुष्य ने आधुनकिता का जामा पहनना आरंभ किया पर्यावरण दूषित होने लगा। यातायात के साधन इस आधुनिकता का पहला चरण था। बढ़ती आबादी ने सोने पर सुहागा का कार्य किया। फिर तो परमाणु संयंत्रए फेक्टरियोंए वनों का अंधाधुंध कटाव आदि ने पर्यावरण को नष्ट करना आरंभ कर दिया। आज हमारे पास जो हैं वह दूषित है। मनुष्य को दूषित पर्यावरण के कारण कितनी ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन कठिनाईयों से बचने के लिए हमें पर्यावरण का संरक्षण करना आवश्यक हैं । इसके लिए जनता को जागरुक किया जाना चाहिए। बस्ती व नगर के समस्त वर्जित पदार्थों के निष्कासन के लिए समुचित व्यवस्था की जाए। जो औद्योगिक प्रतिष्ठान शहरों तथा घनी आबादी के बीच हैए उन्हें नगरों से दूर स्थानांतरित करने का पूरा प्रबन्ध करेए सौर ऊर्जा को बढ़ावा देए वन संरक्षण तथा वृक्षारोपण को सर्वाधिक प्राथमिकता देनी चाहिएए जिससे प्रदूषण मुक्त वातावरण का निर्माण हो सके। प्रकृति को जीवनदान दिया जा सके। यह समय की माँग है और जितनी जल्दी हो इस पर कार्य किया जाना चाहिए। निम्नलिखित बिंदुआंे पर विशेष चर्चा की गई।


वायु प्रदूषण
वायु प्रदूषण के तहत कल-कारखानों का धुंआ, मोटर-वाहनों का धुंआ आदि पर नियंत्रण।
 

जल प्रदूषण
जल प्रदूषण जिसमें कल-कारखानों का दुषित जल नदी-नालों में मिलकर भयंकर जल-प्रदूषण कारता है उस पर नियंत्रण करना।
 

ध्वनि प्रदूषण
मनुष्य शांत वातावरण में रहना पसंद करता हैं। परंतु आजकल कल-कारखानों का शोर, यातायात का शोर, मोटर-गाड़ियांे का चिल्ल-पो, लाउडस्पीकरों की कर्णभेदक  ध्वनि आदि पर अंकुष लगाना होगा।
 

सुधार के उपाय
सुधार के उपायों में यह बताया गया कि विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों से बचने के लिए चाहिए कि अधिक से अधिक पेड़ लगाएं जाएं, हरियाली की  मात्रा अधिक हो। सड़कों के किनारे घने वृक्ष हों। आबादी वाले क्षेत्र खुले हों, हवादार हों, हरियाली से ओतप्रोत हों। कल-कारखाने आबादी वाले क्षेत्रों से दूर हांे और उनसे निकले प्रदूषित जल को नष्ट या साफ करने के बेहतर उपाय हों।